Tuesday, March 04, 2008

मेरा घर

मेरे घर का सीधा सा इतना पता है
ये घर जो हैं चारों तरफ से खुला हैं
न दस्तक ज़रूरी, न आवाज़ देना
मेरे घर का दरवाज़ा कोई नहीं है
है दीवारें गुम और छत भी नहीं

Monday, March 03, 2008

मुकम्मल

तेरे जहाँ में ऐसा नहीं के प्यार न हो
जहाँ उम्मीद हो इसकी वहां नहीं मिलता

फुर्सत

बर्फीली सर्दियों में किसी भी पहाड़ पर
वादी में गूंजती हुई खामोशियाँ सुने
आँखों में भीगे भीगे से लम्हे लिए हुवे

दिल ढूँढता है फिर वही फुर्सत के रात दिन....

आंसू

आज सोचा तो आंसू भर आये
मुद्दतें हो गयी मुस्कुराए

Monday, February 04, 2008

साहिल

पहले पहल जब तेरे लभों पर आया मेरा नाम
हरदम हरपल याद रहेगी वह साहिल की शाम

मायूसी

आज तो दिल की बात कह दी है
तुम सुनो न सुनो, तुम्हारी ख़ुशी
अपनी मायूस हसरतें लेकर
हम चले आये हैं, सनम की गली

Monday, October 01, 2007

दुनिया

है यह दुनिया कौनसी
ऐ दिल मुझे क्या हो गया

Tuesday, September 25, 2007

മരണം

തൽക്കാല ദുനിയാവ് കണ്ടു നീ മയങ്ങാതെ
എപ്പോഴും മരണം നിൻ കൂടെയുണ്ട് മറക്കാതെ.....

!!

उन्हें ख़त लिखा के, दिल मुज्तरिब है
जवाब उनका आया, मुहब्बत न करदे !

Monday, September 24, 2007

हसने की चाह ने कितना मुझे रुलाया हैं
कोई हमदर्द नहीं, दर्द मेरा साया हैं

Wednesday, March 28, 2007

ज़ख्म

ज़ख्म जब भी कोई जेहन - ओ - दिल पर लगाजिंदगी की तरफ एक दरीचा खुलाहम भिगोया किसी साज़ के तार है,चोट खाते रहे गुनगुनाते रहे noon

Wednesday, March 07, 2007

Arundhati Roy

To love. To be loved. To never forget your own insignificance. To never get used to the unspeakable violence and the vulgar disparity of life around you. To seek joy in the saddest places. To pursue beauty to it’s lair. To never simplify what is complicated or complicate what is simple. To respect strength, never power. Above all, to watch. To try and understand. To never look away. And never, never to forget.

Wednesday, February 16, 2005


rock Posted by Hello

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മഞ്ഞ്

ഞെട്ടറ്റു വീഴും ദിനാന്ത പുഷ്പങ്ങൾ തൻ
തപ്താശ്രു പോലെ നിലാവുദിക്കേ
കണ്ടു മറന്ന കിനാവുകളോ
നിശാഗന്ധികളായി വിടർന്നു നിൽക്കേ...

ഇത്തിരിപ്പൂവും കുരുന്നു കരങ്ങളിൽ
ത്രിത്താലമേന്തി പടിക്കൽ നിൽക്കേ
ജന്മാന്തര സ്നേഹബന്തങ്ങളെക്കുറിച്ചെന്തിനോ
ഞാനുമിന്നോർത്തു പോയി....

നാം എന്നിനിക്കാണുമെന്നോർത്തു പോയി........

Tuesday, January 18, 2005

वक्त

जिस्म की बात नहीं थी उनके दिल तक जाना था
लम्बी दूरी तय करने में वक्त तो लगता है
प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है
नए परिंदों को उठने में वक्त तो लगता है

Tuesday, December 28, 2004

एहसान

खुशबू जो लुटाती हैं, मसल्थी हैं उसीको
एहसान का बदला,यही मिलता हैं कलि को.

दोस्ती

हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए हैं
जिंदा तो हूँ जीने की अदा भूल गए हैं

Friday, October 29, 2004

മഴത്തുള്ളി

മഴത്തുള്ളികൾ പൊഴിഞ്ഞീടുമീ നാടൻ വഴി
നനഞ്ഞോടിയെൻ കുടക്കീഴിൽ നീ വന്ന നാൾ....

ഹ്രദയരഹസ്യം

പൂനിലാവിറ്റിയാൽ പൊള്ളുന്ന നെറ്റിയിൽ
ആദ്യത്തെ ചുംബനം സൂക്ഷിക്കുന്നു....
വേർപിരിഞ്ഞെങ്കിലും നീയെന്നെ ഏല്പിച്ച
വേദന ഞാനിന്നും സൂക്ഷിക്കുന്നു....
എന്റെ വേദന ഞാനിന്നും സൂക്ഷിക്കുന്നു....