Wednesday, March 28, 2007

ज़ख्म

ज़ख्म जब भी कोई जेहन - ओ - दिल पर लगाजिंदगी की तरफ एक दरीचा खुलाहम भिगोया किसी साज़ के तार है,चोट खाते रहे गुनगुनाते रहे noon

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