Sunday, August 08, 2010

बच्चे

बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो
चार किताबें पढ़ कर वो भी हम जैसे हो जायेंगे

खामोशी

हम लबों से कह न पाए उन से हाल-इ-दिल कभी
और वो समझे नहीं ये खामोशी क्या चीज़ है

ज़ख्म

ज़ख्म कितने तेरी चाहत से मिले हैं मुझको
सोचता हूँ की कहूँ तुझसे मगर जाने दे

दुआ

लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी
ज़िंदगी शम्मा की सूरत हो खुदाया मेरी
हो मेरे दम से यूं ही मेरे वतन की ज़ीनत
जिस तरह फूल से होती है चमन की ज़ीनत
ज़िंदगी हो मेरी परवाने की सूरत या रब
इल्म की शम्मा से हो मुझको मोहब्बत या रब
हो मेरा काम गरीबों की हिमायत करना
दर्द-मंदों से जईफोन से मोहब्बत करना
मेरे अल्लाह बुराई से बचाना मुझको
नेक जो राह हो उस रह पे चलाना मुझको

Thursday, August 05, 2010

आइना

आइना देखकर तसल्ली हुई
हमको इस घर में जानता है कोई