Tuesday, March 27, 2012

सबब

दिल के लुटने का सबब पूच्छो न सबके सामने
नाम आएगा तुम्हारा, यह कहानी फिर सही

चोट

दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया
जब चली सर्द हवा मैं ने तुझे याद किया
इस का रोना नहीं क्यूं तुमने किया दिल बर्बाद
इस का ग़म है के बहुत देर में बर्बाद किया

Wednesday, March 07, 2012

चलो एक बार फिर से

चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाएं हम दोनो

न मैं तुमसे कोई उम्मीद रक्खूँ, दिल नवाज़ी की
न तुम मेरी तरफ़ देखो गलत अंदाज़ नज़रों से
न मेरे दिल की धड़कन लड़खड़ाये मेरी बातों में
न ज़ाहिर हो तुम्हारी कशमकश का राज़ नज़रों से
चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाएं हम दोनो

तुम्हें भी कोई उलझन रोकती है पेशकदमी से
मुझे भी लोग कहते हैं कि ये जलवे पराए हैं
मेरे हमराह भी रुसवाइयां हैं मेरे माज़ी की
तुम्हारे साथ भी गुज़री हुई रातों के साये हैं
चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाएं हम दोनो

तार्रुफ़ रोग हो जाये तो उसको भूलना बेहतर
ताल्लुक बोझ बन जाये तो उसको तोड़ना अच्छा
वो अफ़साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
उसे इक खूबसूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाएं हम दोनो



A tribute to the great Ravi.......